Monday, August 30, 2021

UPS क्या हैं? (What is UPS?)

 


                                          UPS क्या हैं? (What is UPS?)

UPS का पूरा नाम Uninterruptible Power Supply है। यह एक electronic device होता है। जिसके अंदर electronic parts के साथ-साथ एक बैटरी को भी connect किया जाता है। इसका उपयोग तब होता है। जब electric supply बंद हो जाता है। और तब यह कम्‍प्‍यूटर की मदद से electric supply प्रदान करता है। जिससे कम्‍प्‍यूटर बंद नही होता और अंदर का डेटा भी सुरक्षित रहता है। बाजार में कई साइज और कई शेप्‍स की UPS उपलब्‍ध होती है, लेकिन आमतौर पर यह Rectangular and freestanding style के होते है।

UPS मूल रूप से बैटरी के साथ एक इन्वर्टर है जिसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे पीसी, सर्वर, ऑडियो वीडियो वीडियो आदि के लिए बैटरी बैकअप और सर्ज प्रोटेक्शन प्रदान करने के लिए किया जाता है। कुछ UPS वोल्टेज रेगुलेशन के साथ भी आते हैं। UPS बैटरी को चार्ज करता है और सामान्य ऑपरेशन के दौरान दीवार के आउटलेट से बिजली प्रदान करता है। बिजली की घटना के कारण, यह बैटरी मोड में स्विच करता है और यह सुनिश्चित करता है कि कनेक्ट किए गए डिवाइस सुरक्षित  हैं।

 UPS के प्रकार (Types of UPS)

  • Standby UPS

Standby UPS तब उपयोग किया जाता है। जब power supply बंद हो जाता है। तब यह पॉवर Off होने पर उस Consumed पॉवर को कंप्यूटर में Supply करता है। जिसमे कम्‍प्‍यूटर का डेटा सुरक्षित रहता है।

  • Line Interactive UPS

Line Interactive UPS की designing एक स्टैंडबाय UPS के समान है। यह UPS online और offline दोनो का संयोजन होता है। इस UPS का उपयोग छोटे व्‍यवसाय के लिए किया जाता है। और साथ ही यह UPS आउटपुट के विधुत प्रभाव को निंयत्रित रखता है।

 

 

  • Standby online hybrid

स्टैंडबाई ऑन-लाइन हाइब्रिड 10 kva के तहत UPS में उपयोग कि जाने वाली एक टोपोलॉजी है। जिसे बैटरी से स्‍टैंडबाय कनवर्टर को स्विच on किया जाता है। इसमें बैटरी चार्जर बहुत छोटा होता है जैसे Stand By UPS में होता है।

UPS के कार्य (Functions of UPS)

  • यह एक अस्थिर सोर्स से बिजली को नियंत्रित करता है।
  • उपयोगकर्ता को कंप्यूटर को सही ढंग से स्विच करने और काम को बचाने की अनुमति देता हैं|
  • कंप्यूटर को क्षति के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है।
  • लंबी बिजली आउटेज के दौरान उपकरणों को स्वचालित रूप से बंद कर देता है।
  • बिजली की आपूर्ति की स्थिति की निगरानी और लॉगिंग।लंबी बिजली आउटेज के बाद उपकरण को फिर से शुरू करता हैं|
  • कुछ त्रुटि स्थितियों पर अलार्म प्रदान करता हैं|
  • शॉर्ट-सर्किट सुरक्षा प्रदान करता हैं|

UPS के भाग (Parts of UPS)

Rectifier : यह एक electrical device है। rectifier का मुख्‍य फंक्‍शन AC को DC में कन्‍वर्ट करना हैं। जो alternating current(AC) को direct current (DC) मे convert करता है|

Battery: बैटरी एक electro chemical सेल है जिसे विदयुत के लिए चार्ज किया जाता हे। जब कोई इलेक्ट्रिक पावर सप्‍लाई कर रही होती है, तो उस‍का पॅाजिटिव टर्मिनल कैथौड होता है। और इसका नेगेटिव टर्मिनल एनोड होता है।

Inverter: यह भी एक electrical device है जो rectifier प्रोसेस का उल्टा कार्य करता हैं। यह लोड के उपयोग के लिए आनेवाले DC सप्‍लाई को AC में कन्‍वर्ट करता हैं। जो low voltage DC को  high voltage AC  में कन्‍वर्ट करती है। जो एक solar electric system में, एक इन्‍वर्टर 12, 24 या 48 वोल्‍ट डीसी ले सकता है। और इसे 115 या 230 एसी, घरेलू बिजली में कन्‍वर्ट करता है।

UPS के फायदे (Advantages of UPS)

  1. पावर आउटेज की स्थिति में सभी कम्‍प्‍यूटर और इलेक्ट्रिक सिस्‍टम को व्यवस्थित करता हैं|
  2. बैकअप जनरेट करने के विपरित, एक UPS मे लगभग कोई शोर आउटपुट नही होता है।
  3. एक UPS में बिजली का डिवाइस अगर चलने पर रूक जाये तो भी आपका डेटा सुरक्षित रहता है।
  4. UPS इकाइयां ईको फ्रेंडली होती है और बैटरी पर चलती है जो पांच साल तक चल स‍कती है|
  5. अचानक कम्‍प्‍यूटर के बंद होने पर डेटा loss हो जाता है। लेकिन अगर कम्‍प्‍यूटर मे UPS कनेक्‍ट है तो डेटा सुरक्षित रहता है।

UPS के नुकसान (Disadvantages of UPS)

  1. UPS बैटरी लंबे समय तक नही चलती है और आवश्‍यकता होने पर इसे बदलना पड़ता है।
  2. UPS बैटरी को लंबे समय तक चार्ज रखना पड़ता है।
  3. बडे कॉर्पोरेट कार्यालयों में UPS बिजली की आपूर्ति की स्‍थापना के लिए एक बड़ा निवेश आवश्‍यक है।

यूपीएस और इन्वर्टर में अंतर (Difference between UPS and inverter)

UPS :UPS बिजली कटौती के मामले मे बिजली प्रदान करती है और ज्‍यादातर UPS डेक्‍सटॅाप कम्‍प्‍यूटर के बैकअप लेने के लिए उपयोग किया जाता है।

Inverter: बैटरी और इनवर्टर सर्किट होते है जो डीसी को बिजली मे कन्‍वर्ट करता है और ज्‍यादातर इन्वर्टर का उपयोग घरों में बिजली बैकअप लेने के लिए किया जाता है।

UPS:UPS का उपयोग आमतौर पर सिस्‍टम का बैकअप लेने के लिए किया जाता है क्योंकि बैकअप पावर सोल्यूशन पर गिरने के लिए एक माइक्रोसेकंड लगता है।

Inverter: स्विचिंग मे देरी होने के कारण इनवर्टर कम्‍प्‍यूटर का बैकअप लेने के लिए उपयोग \\\नही है। क्‍योकि कम्‍प्‍यूटर केवल डेटा और बिना सेव किये गए डेटा को खो देता है बल्कि हार्ड डिस्‍क और मदरबोर्ड को भी नुकसान पॅहुचा सकता है

 

What is a Transformer ?





ट्रांसफॉमर के लाभ तो बहुत है।  यह एक ऐसा कॉम्पोनेन्ट है जिसका इस्तेमाल लगभग हर क्षेत्र में होता है।  यहाँ आपको ट्रांसफार्मर के कुछ फायदों को बारे में बताया जा रहा है.

ट्रांसफार्मर के लाभ  Benefit Of Transformer 


1.            जैसा की सभी जानते है ही की ट्रांसफॉमर को करंट को कम करने या बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता है।  इसके द्वारा सिग्नलवोल्टेज या करंट को बहुत कम लागत से आसानी से घटाया और बढ़ाया जा सकता है।  

2.            इसमें एक तरफ की ऊर्जा को दूसरी तरफ बिना किसी फिजिकल रिलेशन से भेजा जा सकता है।  इस लिए इसकी प्राइमरी वाइंडिंग सेकेंडरी वाइंडिंग से बिलकुल अलग होती है।  

3.            ट्रांसफार्मर में किसी भी प्रकार से चलने पर को गति नहीं होती है।  इस लिए इसके मैन्टेन्स की कोई जरुरत नहीं पड़ती है।  

4.            इसमें कोई गति नहीं होने के कारन इसमें कोई शोर नहीं होता है।  

5.            इसके द्वारा हाई वोल्टेज या सिग्नल को कम या ज्यादा बहुत ही आसानी से किया जा सकता है।  

6.            इसमें ऊर्जा की बरबादी  न के बराबर होती है।  

7.       Transformer ही एक ऐसा device  है को करंट को बिना किसी physical attachment के एक 

स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने का काम करता है।  और इसके आलावा करंट को कम या ज्यादा 

करने में अहम भूमिका निभाता है


1.     
जैसा की मैंने आपको अपनी पिछली पोस्ट में आपको  Coil के बारे में बताया था। ट्रांसफार्मर क्वाइल का ही रूप है लेकिन इसमें दो या अधिक Coil  का इस्तमाल होता है। 

मै  आपको ज्यादा किताबी भाषा का इस्तेमाल न करके सीधे सादे शब्दों में बताने की कोसिस करूँगा ताकि आपको आसानी से समझ में आये। 
ट्रांसफार्मर म्यूचयल इंडक्शन के सिद्धांत पर काम करता है। मान लीजिये एक ट्रांसफार्मर है जिसमे चार तार है दो तार एक तरफ और दो तार दूसरी तरफ आप एक तरफ से 220 AC वोल्ट देते है और दूसरी  तरफ से आपको 12 AC वोल्ट मिलते है।  आखिर यह होता कैसे है।  जबकि ट्रांसफार्मर में तार और लोहे के कोर के अलावा कुछ नहीं होता।  फिर यह कैसे  करंट को  कम कर देता है।  यही तो खासियत होती है ट्रांसफार्मर में।   

क्वाइल में दो तरह के गुण होते है।   
पहला →  की जब उसमे Ac करंट दी जाती है तो उसके चारो तरफ एक मैगनेटिक फील्ड या चुंबकीय क्षेत्र  बन जाता है जिसको Electromotive Force कहते है।

दूसरा जब किसी क्वाइल को magnetic field में लाया जाता है तो क्वाइल के इलेक्ट्रॉन्स मूव करने लगते है जिसके वजह से क्वाइल के सिरो से ac करंट बहने लगता है।

क्वाइल के इसी गुण का इस्तेमाल छोटे से लेकर बड़े ट्रांसफार्मर बनाने के लिए होता है। 

आशा है की आपको समझ में आ गया होगा।  आप चाहे तो एक प्रयोग आप कर के देख सकते है। 
किसी प्रकार के इन्सुलेटेड  तार को किसी भी आधार या पेंसिल पर लपेट दे और उसके दोनों सिरो पर इंसुलेशन हटाकर एक छोटी LED (कम वाल्ट ) जोड़ दे , अब चुम्बक को क्वाइल के ऊपर आगे पीछे हिलाये तो एलईडी जलने लगेगी। 


2.    ट्रांसफार्मर

3.      ट्रांसफार्मर में तो कम से कम दो क्वाइल का इस्तेमाल किया जाता है जिनको वाइंडिंग कहते है।
ट्रांसफार्मर में जिस वाइंडिंग पर करंट देते है उसको प्राइमरी वाइंडिंग कहते है
और जिससे करंट प्राप्त किया जाता है उसको सेकंडरी वाइंडिंग कहते है। 

ट्रांसफार्मर के प्रकार
स्टेप डाउन ट्रांसफार्मर → इस प्रकार के Step-Down Transformer  का इस्तेमाल ज्यादा वोल्ट को कम करने के लिए होता है। जैसे : → power house Transformer, Laptop Charger Transformer, Mobile Phone Charger Transformer ect.


1.     

स्टेप अप ट्रांसफार्मर  →  कम वोल्ट को बढ़ाने  के लिए Step-Down Transformer का इस्तेमाल होता है। जैसे → Inverter Transformer, Ups Transformer, Stabilizer Transformer etc.

2.    

3.     

ऑटो ट्रांसफार्मर       → इस प्रकार  के ट्रांसफार्मर का इस्तेमाल आवश्यकता के अनुसार अपने आप कम वोल्ट को ज्यादा या ज्यादा वोल्ट को कम  करने के लिए होता है जैसे  
Crt Monitor EHT, Ups, Inverter, Auto Transformer  ect